Most Recent

मालिक की मौत के बाद संपत्ति को कानूनी लड़ाई से बचाएं: वारिसों को तुरंत उठाने चाहिए ये 7 जरूरी कदम | Property Inheritance Guide 2026

मालिक की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद से बचने के लिए वारिस क्या करें? वसीयत, म्यूटेशन, लीगल हेयर सर्टिफिकेट, पार्टिशन डीड सहित पूरी प्रक्रिया विस्तार से जानें। कानूनी विशेषज्ञों की सलाह।

मालिक की मौत के बाद संपत्ति को कानूनी लड़ाई से बचाएं: वारिसों को तुरंत उठाने चाहिए ये जरूरी कदमभारत में संपत्ति विवाद सबसे ज्यादा लंबे चलने वाले केसों में शामिल हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हजारों ऐसे मामले पेंडिंग हैं जो आसानी से टाले जा सकते थे, अगर वारिसों ने समय पर सही कदम उठाए होते। मालिक की मौत के बाद परिवार को तुरंत कुछ जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए, ताकि संपत्ति विवाद की भेंट न चढ़े।यह लेख विशेष रूप से उन परिवारों के लिए है जिनके पास घर, प्लॉट, फ्लैट या कृषि भूमि है।

1. सबसे पहले चेक करें – क्या मृतक ने वसीयत (Will) छोड़ी है?अगर वसीयत है तो सबसे पहले उसे सुरक्षित रखें।

वसीयत को प्रोबेट (Probate) करवाना बेहतर है, भले ही कुछ राज्यों में अब यह वैकल्पिक हो गया हो। इससे कानूनी वैधता मजबूत होती है।

अगर वसीयत नहीं है (Intestate Death) तो हिंदू सक्सेशन एक्ट 1956, मुस्लिम पर्सनल लॉ या अन्य लागू कानून के अनुसार लीगल वारिस तय करें।


जरूरी: सभी वारिसों को शामिल करें। एक भी वारिस छूट गया तो भविष्य में सारे ट्रांजेक्शन अमान्य हो सकते हैं।2. लीगल हेयर सर्टिफिकेट (Legal Heir Certificate) प्राप्त करेंतहसीलदार या SDM कार्यालय से लीगल हेयर सर्टिफिकेट निकलवाएं।

इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आधार, जन्म प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज लगेंगे।

यह सर्टिफिकेट बैंक अकाउंट, बीमा, पेंशन और संपत्ति के नाम ट्रांसफर के लिए बहुत जरूरी है।


3. संपत्ति के रिकॉर्ड अपडेट करवाएं (Mutation + 7/12 Extract)म्यूटेशन (नामांतरण) करवाना बहुत महत्वपूर्ण है:7/12 उतारा (ग्रामीण संपत्ति)

प्रॉपर्टी कार्ड / म्यूनिसिपल रिकॉर्ड (शहरी संपत्ति)

खाता-खतौनी, नामांतरण एंट्री


ध्यान दें: म्यूटेशन से टाइटल नहीं बदलता, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मान्यता मिलती है। बिना म्यूटेशन के आप संपत्ति बेच या गिरवी नहीं रख सकते।4. संपत्ति की प्रकृति समझें (Self-acquired, Ancestral, Leasehold आदि)संपत्ति किस प्रकार की है, यह जानना बहुत जरूरी है:संपत्ति का प्रकार

खास बातें

स्व-अर्जित (Self-acquired)

वसीयत से पूरी आजादी

Ancestral Property

कोपार्सनरी अधिकार, बंटवारा जटिल

Leasehold / CIDCO / MHADA

अथॉरिटी की अनुमति जरूरी

Freehold

आसान ट्रांसफर


एन्कम्ब्रेंस चेक करें: लोन, चार्ज, लिटिगेशन है या नहीं, यह पता करें।5. परिवार में लिखित समझौता जरूर करेंमौखिक समझौते कभी न करें।

रजिस्टर्ड पार्टिशन डीड, रिलीज डीड या फैमिली सेटलमेंट जरूर करवाएं।

सभी वारिसों की सहमति से बंटवारा करें और रजिस्टर्ड दस्तावेज बनवाएं।


6. मौत के बाद परिवार संपत्ति में रह सकता है या नहीं?कोई विवाद न हो → परिवार आराम से रह सकता है।

वसीयत हो → वसीयतधारी मालिक बन जाता है, लेकिन कब्जा देने के लिए कोर्ट जाना पड़ सकता है।

टाइटल डिस्प्यूट → कोर्ट स्टेटस-क्वो बनाए रखता है। जब तक फैसला न हो, मौजूदा कब्जेदारों को आमतौर पर नहीं हटाया जाता।


7. जरूरी दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड रखें

मूल दस्तावेज (टाइटल डीड)

पिछले 30 साल के टैक्स रसीद

यूटिलिटी बिल (बिजली, पानी)

बैंक स्टेटमेंट, इंश्योरेंस आदि

ये दस्तावेज विवाद की स्थिति में सबसे मजबूत सबूत होते हैं।निष्कर्ष और विशेषज्ञ सलाहसंपत्ति विवाद ज्यादातर दस्तावेजों की कमी, गलतफहमी और मौखिक व्यवस्था की वजह से होता है। समय रहते वसीयत बनवाएं, रिकॉर्ड अपडेट रखें और परिवार में पारदर्शिता बनाए रखें।समय पर म्यूटेशन और कानूनी अनुपालन से आप न सिर्फ समय, पैसे और रिश्तों की बचत कर सकते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी सुरक्षित संपत्ति सौंप सकते हैं।

कीवर्ड: मालिक की मौत के बाद संपत्ति, वारिस क्या करें, प्रॉपर्टी म्यूटेशन, लीगल हेयर सर्टिफिकेट, वसीयत प्रोबेट, संपत्ति बंटवारा, property inheritance after death in India।

Rajanish Kant शनिवार, 4 अप्रैल 2026
भारत में Gold Loan का बूम: दिसंबर में मूल्य के हिसाब से 108% उछाल, जानिए पूरा विश्लेषण | BeYourMoneyManager

भारत में गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। दिसंबर 2025 में वॉल्यूम में 45% और वैल्यू में 108% की भारी वृद्धि दर्ज की गई। महिलाएं और ग्रामीण क्षेत्र आगे, पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

भारत में गोल्ड लोन का जबरदस्त बूम: दिसंबर में लोन मूल्य के हिसाब से 108% की बढ़ोतरी

अगर आप सोच रहे हैं कि पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड या होम लोन के बाद अगला बड़ा रिटेल प्रोडक्ट क्या होगा, तो जवाब है – गोल्ड लोन। हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तिमाही में गोल्ड लोन ने रिटेल लेंडिंग में तहलका मचा दिया है।

Credit Market Indicator (CMI) के अनुसार, इस तिमाही में गोल्ड लोन की संख्या (वॉल्यूम) में 45% और मूल्य (वैल्यू) में 108% की शानदार वृद्धि हुई है। अब गोल्ड लोन रिटेल लोन ओरिजिनेशन में सबसे बड़ा हिस्सा रखता है – कुल वॉल्यूम का 36% और कुल वैल्यू का 39%।क्यों बढ़ रहा है गोल्ड लोन का क्रेज?इस बूम के पीछे सबसे बड़ा कारण है सोने की कीमतों में तेज उछाल। मार्च 2023 के बाद सोने की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इससे औसत लोन टिकट साइज (Average Ticket Size) भी 1.8 गुना बढ़ गया है। 

लोग अपने पुराने गहनों पर पहले से ज्यादा लोन ले पा रहे हैं।रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि गोल्ड लोन की ग्रोथ अब सिर्फ मांग पर नहीं, बल्कि एसेट वैल्यूएशन (सोने की बढ़ती कीमत) पर भी निर्भर कर रही है। यानी भविष्य में सोने की कीमतें अगर स्थिर रहीं या घटीं, तो ग्रोथ भी प्रभावित हो सकती है।गोल्ड लोन अब मुख्यधारा का प्रोडक्ट बन गया हैआउटस्टैंडिंग बैलेंस में गोल्ड लोन अब दूसरे नंबर पर है (11% शेयर), सिर्फ होम लोन से पीछे।

दक्षिण भारत अभी भी गोल्ड लोन का गढ़ बना हुआ है, लेकिन नॉर्थ और वेस्ट में तेजी से विस्तार हो रहा है।राजस्थान: वॉल्यूम में 79% YoY ग्रोथ

उत्तर प्रदेश: 96% YoY ग्रोथ


महिलाएं: कुल गोल्ड लोन उपभोक्ताओं में करीब 40% हिस्सा

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र: कुल ओरिजिनेशन का 68%

लेंडर्स अब ज्यादातर क्रेडिट टेस्टेड (Prime और Above) कस्टमर्स को टारगेट कर रहे हैं, जिनका हिस्सा 57% है।अन्य लोन कैटेगरी की स्थितिहोम लोन में वैल्यू 13% बढ़ी

क्रेडिट कार्ड ओरिजिनेशन में 11% की गिरावट

कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में सकारात्मक रुझान


निवेशकों और आम लोगों के लिए क्या मतलब है?गोल्ड लोन अब सिर्फ जरूरत के समय उधार लेने का साधन नहीं रहा। यह एक व्यवस्थित और तेजी से बढ़ता हुआ फाइनेंशियल प्रोडक्ट बन गया है। खासकर उन परिवारों के लिए जो सोना रखते हैं और लिक्विडिटी चाहते हैं, बिना शेयर मार्केट या म्यूचुअल फंड के रिस्क के।Be Your Money Manager की सलाह:

अगर आप गोल्ड लोन लेने की सोच रहे हैं तो:LTV (Loan to Value) रेशियो चेक करें (ज्यादातर 75% तक सुरक्षित होता है)

ब्याज दर की तुलना करें (NBFC vs बैंक)

सोने की कीमत गिरने का रिस्क समझें

EMI के बजाय Bullet repayment ऑप्शन पर विचार करें अगर संभव हो

निष्कर्ष

2025-26 में गोल्ड लोन भारत की रिटेल क्रेडिट स्टोरी का सबसे चमकदार अध्याय बनता दिख रहा है। बढ़ती सोने की कीमतें, ग्रामीण-महिला वर्ग की भागीदारी और नई ज्योग्राफी में विस्तार इसे अगले कुछ सालों का सबसे आकर्षक लोन प्रोडक्ट बना सकता है।अगर आपके पास सोना है और फाइनेंशियल जरूरत है, तो गोल्ड लोन एक स्मार्ट ऑप्शन हो सकता है – बशर्ते सही प्लानिंग के साथ लिया जाए।


Rajanish Kant
सीनियर सिटीजन TDS एग्जेम्प्शन 2026: फॉर्म 15H की जगह अब फॉर्म 121, पूरी डिटेल, कैसे भरें और गलतियां से बचें | BeYourMoneyManager

 

सीनियर सिटीजन अब फॉर्म 15H की जगह फॉर्म 121 भरकर TDS बच सकते हैं। FY 2026-27 में नया यूनिफाइड फॉर्म 121 क्या है, कौन इस्तेमाल कर सकता है, जरूरी शर्तें, UIN, PAN-Aadhaar लिंक और आम गलतियां – विस्तार से जानें।सीनियर सिटीजन TDS एग्जेम्प्शन 2026: फॉर्म 15H अब पुराना, नया फॉर्म 121 कैसे काम करेगा?नमस्ते दोस्तों,  अगर आप सीनियर सिटीजन हैं और आपके बैंक FD, पोस्ट ऑफिस, या अन्य इनकम पर TDS कट रहा है, तो अब पुरानी व्यवस्था बदल गई है। वित्त वर्ष 2026-27 से फॉर्म 15H और फॉर्म 15G दोनों को हटाकर एक नया यूनिफाइड फॉर्म 121 लाया गया है।

इस लेख में Be Your Money Manager की टीम आपको पूरी जानकारी दे रही है – नया फॉर्म क्या है, कौन भर सकता है, कैसे भरें, जरूरी शर्तें और सबसे महत्वपूर्ण – कौन-सी गलतियां करने से बचें।फॉर्म 121 क्या है? क्यों लाया गया?Income Tax Rules 2026 के तहत अब Form 15G (60 साल से कम उम्र वालों के लिए) और Form 15H (सीनियर सिटीजन के लिए) को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।  फॉर्म 121 एक ही फॉर्म है जो सभी उम्र के टैक्सपेयर्स इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका मकसद है – अगर आपका कुल टैक्सेबल इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है और टैक्स लायबिलिटी शून्य (Nil) है, तो TDS न कटे। 

नई व्यवस्था के फायदे:

उम्र के आधार पर अलग-अलग फॉर्म भरने की झंझट खत्म

आसान और यूनिफाइड प्रक्रिया

कम अनुभवी टैक्सपेयर्स के लिए आसान

कौन भर सकता है फॉर्म 121? 

(Eligibility)आपका अनुमानित कुल आय (Estimated Total Income) बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम हो।

नए टैक्स रिजीम में ₹4,00,000 तक (सभी के लिए)

ओल्ड टैक्स रिजीम में: ₹3,00,000 (सीनियर सिटीजन) / ₹2,50,000 (60 से कम)

जरूरी शर्तें (2026-27):पिछले 2 वित्त वर्षों का ITR फाइल किया हो (अगर इनकम टैक्सेबल थी तो)

PAN Aadhaar से लिंक्ड और एक्टिव हो

टैक्स लायबिलिटी Nil हो

अगर ITR नहीं फाइल किया था तो आपको “Specified Person” माना जाएगा और फॉर्म 121 मान्य नहीं होगा।फॉर्म 121 किन इनकम पर TDS रोक सकता है?

बैंक FD/RD/Post Office Interest

Corporate Bonds का ब्याज

Dividend (शेयर और म्यूचुअल फंड)

Rent (कुछ सीमा से ऊपर)

EPF की समय से पहले निकासी

Taxable Insurance Proceeds


नोट: सैलरी और बिजनेस इनकम पर फॉर्म 121 से TDS नहीं रोक सकते, लेकिन कुल आय गणना में इन्हें शामिल करना जरूरी है।

नया फीचर: UIN (Unique Identification Number) फॉर्म 121 भरने पर आपको UIN मिलेगा। यह TDS रिटर्न फाइलिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है। UIN से बैंक/कंपनी आसानी से आपका क्लेम ट्रैक कर पाएगी और डुप्लिकेट क्लेम रुकेंगे।


फॉर्म 121 कैसे भरें? (Step-by-Step)

संबंधित बैंक/कंपनी की वेबसाइट पर लॉगिन करें

TDS Declaration / Form 121 सेक्शन में जाएं

PAN, Aadhaar, पिछले 2 साल का ITR डिटेल भरें

अनुमानित कुल आय का ब्रेकअप दें

डिक्लेयर करें कि टैक्स लायबिलिटी Nil है

सबमिट करें → UIN जनरेट होगा


महत्वपूर्ण: हर बैंक/पेयर को अलग-अलग फॉर्म 121 जमा करना होगा। एक फॉर्म सबके लिए नहीं चलेगा।

सीनियर सिटीजन TDS बचाने की आम गलतियां (Mistakes to Avoid)

देर से फॉर्म भरना → TDS कटने के बाद बैंक रिफंड नहीं करते

सिर्फ एक बैंक में फॉर्म भरना → बाकी जगह TDS कटता रहेगा

PAN-Aadhaar न लिंक करना → 20% TDS लगेगा

ITR डिटेल गलत भरना → फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है

ऑटो-अप्रूवल पर भरोसा → बैंक चेक करेगा, गलत जानकारी पर नोटिस आ सकता है

ITR में TDS डिटेल रिपोर्ट न करना → भविष्य में दिक्कत

टिप्स सीनियर सिटीजन के लिए अप्रैल के पहले सप्ताह में ही सभी बैंकों में फॉर्म 121 जमा कर दें

PAN-Aadhaar लिंकिंग जरूर चेक करें

अगर कई बैंक हैं तो सभी में अलग-अलग फॉर्म भरें

कुल आय का सही अनुमान लगाएं (FD ब्याज + पेंशन + अन्य)

निष्कर्ष:

फॉर्म 121 सीनियर सिटीजन और छोटी इनकम वाले टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा राहत का कदम है। सही समय पर और सही तरीके से भरने पर आप अनावश्यक TDS से बच सकते हैं।


Rajanish Kant शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026
ITR Filing 2026: AY 2026-27 के लिए नये ITR Forms जारी,जानें पूरी डिटेल | BeYourMoneyManager

ITR Filing 2026: सरकार ने AY 2026-27 के लिए ITR फॉर्म्स जारी कर दिए हैं। ITR-U और ITR-V फॉर्म में क्या नया है, अपडेटेड रिटर्न कब और कैसे फाइल करें, पेनाल्टी, डेडलाइन और पूरी जानकारी हिंदी में।

BeYourMoneyManager आपको इस लेख में ITR-U और ITR-V के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहा है।

ITR-U क्या है? (Updated Income Tax Return)ITR-U प्रावधान साल 2022 में शुरू किया गया था। यह टैक्सपेयर्स को अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का मौका देता है। अब बजट 2025 के बाद इसकी समय सीमा बढ़ाकर 4 साल कर दी गई है।ITR-U कब फाइल कर सकते हैं?
  • मूल रिटर्न पहले नहीं भरा हो
  • आय रिपोर्ट नहीं की गई हो या कम रिपोर्ट की गई हो
  • लॉस को सही से रिपोर्ट नहीं किया गया हो
  • गलत हेड ऑफ इनकम चुना गया हो
  • कैरी फॉरवर्ड लॉस, अनअब्जॉर्ब्ड डेप्रिशिएशन या टैक्स क्रेडिट को सुधारना हो
  • सेक्शन 148 नोटिस के जवाब में रिटर्न फाइल करना हो
ITR-U की नई समय सीमा और पेनाल्टी (2026 से लागू)
वर्ष
समय सीमा (असेसमेंट ईयर के अंत से)
अतिरिक्त टैक्स (पेनाल्टी)
पहला वर्ष
12 महीने
25%
दूसरा वर्ष
24 महीने
50%
तीसरा वर्ष
36 महीने
60%
चौथा वर्ष
48 महीने
70%

उदाहरण: FY 2020-21 (AY 2021-22) का अपडेटेड रिटर्न 31 मार्च 2026 तक फाइल किया जा सकता है।ITR-U फॉर्म में नया क्या है?नये फॉर्म में PART B ATI Computation में नया कॉलम जोड़ा गया है:
  • “Additional income-tax liability on updated income where return is filed in response to notice issued u/s 148”
यह बदलाव उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो 148 नोटिस के जवाब में अपडेटेड रिटर्न फाइल कर रहे हैं।ITR-V क्या है?ITR-V यानी Income Tax Return Verification फॉर्म रिटर्न फाइल करने के बाद वेरिफिकेशन के लिए इस्तेमाल होता है। अगर आप Aadhaar OTP या डिजिटल सिग्नेचर से वेरिफाई नहीं करते हैं तो ITR-V को प्रिंट करके CPC बेंगलुरु को भेजना पड़ता है।महत्वपूर्ण बातें:
  • ITR-V जमा करने की समय सीमा: रिटर्न फाइल करने के 30 दिन के अंदर
  • 30 दिन के अंदर वेरिफाई करने पर रिटर्न की तारीख अपलोड वाली तारीख मानी जाएगी
AY 2026-27 के लिए ITR Filing की तैयारी
  1. सही ITR फॉर्म चुनें (ITR-1 से ITR-7)
  2. अगर गलती हुई हो तो ITR-U का फायदा उठाएं
  3. समय पर वेरिफिकेशन (ITR-V) जरूर करें
  4. दस्तावेज तैयार रखें: Form 16, बैंक स्टेटमेंट, निवेश प्रमाण, कैपिटल गेन स्टेटमेंट आदि
CA की सलाह:
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, अपडेटेड रिटर्न की सुविधा टैक्सपेयर्स को लचीलापन देती है, लेकिन पेनाल्टी बढ़ने के कारण जितनी जल्दी हो सके सुधार कर लें।
निष्कर्षसरकार ने ITR Filing 2026 की प्रक्रिया को और पारदर्शी और लचीला बनाने की कोशिश की है। ITR-U अब 4 साल तक उपलब्ध है, लेकिन देरी से फाइल करने पर पेनाल्टी भी ज्यादा लगेगी। ITR-V के सही वेरिफिकेशन से आपका रिटर्न वैध माना जाएगा।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। व्यक्तिगत सलाह के लिए Chartered Accountant से संपर्क करें।

Rajanish Kant बुधवार, 1 अप्रैल 2026